Tuesday, October 27, 2020

कांकेर से पवन कुमार सेन की रचना- इंसानियत

रचनाकार - पवन कुमार सेन
शहर/राज्य - कांकेर/छत्तीसगढ़
विधा - छंद मुक्त
शीर्षक - इंसानियत 

धरती डोल रही
आकाश गरज रहा ।
इंसानियत का देखो
अब नहीं धीरज रहा ।।

मानवता शर्मसार हो चुकी
देखो करूणा ढिढक रही ।
इंसान की इंसानियत देख
धरम भी बिदक रही ।।

लोग ठहरे हाड़-मांस के
जी-ज़ान न रहा ।
इंसानियत का देखो
अब ईमान न रहा ।।

पुछ- परख क्या चीज है
कोई पहचान न रहा ।
इंसानियत लोगों का देख "पवन"
अब तक गुमनाम ही रहा।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...