जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-परिवर्तन
विधा-कविता (छंद मुक्त)
परिवर्तन ऋतुओं का
प्रकृति में लाता है
नित नई बहार,
लद जाते हैं वृक्ष
सुमधुर फलों से,
लताएं फूलों से,
महक उठती है
संपूर्ण धरती|
परिवर्तन अवस्था का
मानव में लाता है
कई परिवर्तन|
जन्म,शिशु,बालक,
किशोर,युवा,प्रौढ़,
और वृद्धावस्था से
गुजर मानव समझ
जाता है मृत्यु का
गुढ़ रहस्य|
किंतु परिवर्तन
हृदय का,
मानव जीवन ही
बदल देता है
और वह बन
जाता है मानव से
महामानव,
अशोक,बुद्ध और
विवेकानंद की
तरह|
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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