नाम - सोमेश सिन्हा मुसाफिर
पता- छत्तीसगढ़ , बलौदाबाजार
विधा- छंदमुक्त
शीर्षक - तुम हो
ऐसा लगता है, जिंदगी तुम हो।
अजनबी जैसे, अपने तुम हो।।
मैं तो मिट्टी का दिया हूँ,
उसमे सौंदर्य का दीप तुम हो।।
दूर हो चांद की तरह,
उस चांदनी का एहसास तुम हो।।
निहारता जिन फूलो को मै,
उन फूलो की महक तुम हो।।
पतझड़ की तरह जीवन मेरा,
वसन्त का सौंदर्य तुम हो।।
मुसाफिर हूँ अनजान राहों का,
आखिर मंजिल तो तुम ही हो।।
- सोमेश सिन्हा मुसाफिर
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Wednesday, October 14, 2020
बलौदाबाजार से सोमेश सिन्हा मुसाफिर की रचना- तुम
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Very nice mama ��
ReplyDeleteIt's very nice somesh ji (musafir)
ReplyDeleteExcellent
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