Thursday, October 15, 2020

महासमुन्द से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- किसान की दशा

नाम - पुष्पा गजपाल "पीहू"
जिला-महासमुन्द
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय -" किसान की दशा"
विधा  -  मुक्तक रचना

खेतों पर फसलें लहराए ,
    जब  मेहनत करे किसान ।
दुनिया का ये   पेट भरके,
    भूखों  का करते निदान ।
धरती  के मेहनती   बेटा ,
    कभी धूप - छाँव न जानें ।
दिन भर बहाते हैं पसीना,
    होते  मिट्टी का मितान ।।

बाढ़ , सूखा ,अकाल सहते ,
      खाद , बीज को हो परेशान।
अन्न ,उपज का मूल्य न पाते,
       फिर  भी  करे नव संधान।
सहते  हैं  गरीबी का  मार ,
      पर    कर्तव्य  नही   भूले ।
जगत  का करते हैं उद्धार ,
     हे किसान ! तुम हो महान ।।

बेबस  और  लाचार  होते ,
     भूमि पर  विश्वास   करते।
सूखा , बंजर , चट्टानों  पर ,
     कर्म  कर नव प्राण भरते।
लाखो कष्ट सहन करके ये,
   लाते  भू   पर   खुशहाली ।
धरती माँ  के सपूत किसान ,
   श्रमकर  हरियाली भरते ।।

पुष्पा गजपाल "पीहू"
महासमुंद(छ. ग.)


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