नाम - पुष्पा गजपाल "पीहू"
जिला-महासमुन्द
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय -" किसान की दशा"
विधा - मुक्तक रचना
खेतों पर फसलें लहराए ,
जब मेहनत करे किसान ।
दुनिया का ये पेट भरके,
भूखों का करते निदान ।
धरती के मेहनती बेटा ,
कभी धूप - छाँव न जानें ।
दिन भर बहाते हैं पसीना,
होते मिट्टी का मितान ।।
बाढ़ , सूखा ,अकाल सहते ,
खाद , बीज को हो परेशान।
अन्न ,उपज का मूल्य न पाते,
फिर भी करे नव संधान।
सहते हैं गरीबी का मार ,
पर कर्तव्य नही भूले ।
जगत का करते हैं उद्धार ,
हे किसान ! तुम हो महान ।।
बेबस और लाचार होते ,
भूमि पर विश्वास करते।
सूखा , बंजर , चट्टानों पर ,
कर्म कर नव प्राण भरते।
लाखो कष्ट सहन करके ये,
लाते भू पर खुशहाली ।
धरती माँ के सपूत किसान ,
श्रमकर हरियाली भरते ।।
पुष्पा गजपाल "पीहू"
महासमुंद(छ. ग.)
Thursday, October 15, 2020
महासमुन्द से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- किसान की दशा
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