स्थान-नवापाराखुर्द
जिला -जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-रेखाचित्र
विषय- परिश्रम
शीर्षक-मकान
उस समय मेरे पास बाइक नहीं था । खड़ा करते ही वहां पर मेरा छोटा सा सात साल का लड़का खेल रहा था । मैं लड़का को मना करते हुए कहा देखकर चक्का को घुमाना कहीं घुमाते हुए तुम्हारे उपर न गिर जाए ।ऐसा सोचकर उसे सायकिल से दूर करने के बहाने गोदी में उठा कर बरामदा में ले गया और कहने लगा चलो चाय पितें है ।उसकी मम्मी को डांटते हुए मैं बोला तुम यहां चाय बनाने में मस्त हो लड़का मेरे पहुंचते ही सायकिल के पास पहुंच गया और चक्का को घुमा रहा था उसने कोई जवाब किए बगैर मेरे लिए एक गिलास पानी मुस्कुराते हुए लेकर आई और हाथ में थमा दी,
मैं मां के पास जाकर बैठ गया मां सब्जी काट रही थी,आलू मूंनगा और पास में था झूनंगा ।
मां ने एक बात कहीं बेटा तुम्हारे बाबूजी और मेरा एक सपना है हम लोगों के पास रहने के लिए एक पक्का मकान । पिताजी जी क्रोधित नजरों से देखते हुए बोले बेटा मेरा कोई स्वप्न नहीं है तुम्हारे मां के लिए बनादो । मकान तुरंत तो नहीं बना । मां ने बीज बो दी ।
कुछ समय बाद मकान रहने लायक बनाया गया जहां आज हम रह रहे हैं ।आज मां और बाबूजी नहीं उनकी तस्वीर टंगी हुई है । उसे देख- देख याद कर जीवन गुजार रहे हैं । आज मन में सोचता हूं, इससे दिन ओ अच्छा था भले मकान नहीं थे माता पिता तो थे ।आज मकान होकर भी मैं मैं अपने आपको बिना मकान का समझता हूं । लेकिन समय परिश्रम और आशीर्वाद से कई अच्छे कार्य जग में हुए हैं होते रहेंगे भले ही मैंने एक मकान बनाया । किसी ने गाड़ी खरीदी किसी ने खेत खरीदा, था वही आधार किसी ने तो नींव रखी । इससे दूर कोई नहीं ।आओ हम भी कुछ रेखा खींच दें और आगे बढ़े कोई तो समझने वाला होगा ।
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