संबलपुर, जिला-कांकेर (छ.ग.)
विषय-दार्शनिक भाव से संबंधित
जीवन और मृत्यु का
क्रम सतत चलता रहता है,
हवेली में शृंगार श्मशान
में वीतराग रहता है।
नवप्रातः में नवआस
लिए जब नवागन्तुक आता है,
जग में जद्दोजहद देख
वह लूट पीट जाता है।
जग को चलाने वाला
नियंता अटल सत्य है,
ऊर्जा के पूंज के कण-कण
में नवल लक्ष्य है।
प्रकृति के सुंदरतम भावों
में दृश्य अद्भुत है,
सुख-दुःख ,सन्ताप
में मन अभिभूत है।
नव जीवन को आओ
नव आयाम दे प्रबल नियन्ता से मिल जाएं,
जग में कल किसने
देखा है,आओ अभी नव
पहल में लग जाएं।
दार्शनिक भाव-1.जीवन और मृत्यु का क्रम चलता रहता है,
2.हवेली में शृंगार,श्मशान में वीतराग रहता है।
3.जग को चलाने वाला नियन्ता एक अटल सत्य है आदि।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)
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