रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- जलप्रपात एवं प्राकृतिक सौन्दर्य।
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- जलप्रपात
#######################
निश्चय कर निर्मल नद जब,
अविरल बहती जाती है।
और राह में रोड़े जैसा,
उच्चस्थल कोई पाती है।
निर्झर वह निडर होकर तब,
ऊपर से कूद जाती है।
दृश्य मनोरम प्रकृति तब,
जल प्रपात बनाती है।
झर - झर झरती जलधारा,
सुनाती संगीत मनोरम।
उसपर श्वेत ऊफाने उठती,
उर में ऊर्जा भरती हरदम।
देख दृश्य मानो लगता,
उतरती स्वर्ग से अमृत धारा।
मनवा स्थिर हो जाता है,
देख मनोरम यह नज़ारा।
#######################
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने जलप्रपात की सुन्दरता का वर्णन किया है।
Thursday, October 15, 2020
महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- जलप्रपात
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
No comments:
Post a Comment