रचनाकार-एच-एस-अरमो, अरमान ।
निवासी-बायरन बाज़ार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विषय-जलप्रपात व प्राकृतिक सौंदर्य ।
शीर्षक-""प्राकृतिक छटा """ ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
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==||▪•"प्राकृतिक छटा "•▪||==
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हिमालय की गोद से---
बहती है,अविरल जलधारा,
गंगा,गोमती,गंडक व कोसी नदियाँ,
ये है,उदगम स्थल,इनका सारा ।
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भारत देश,प्रायद्वीप है न्यारा---
उत्तर में हिमालया,पूरब में घाटियाँ,
जहाँ सघन वन,अतिवर्षा की बौछारा ।
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गुजरात बना ,गिरीराज का डेरा---
जहाँ है,वनों में,सिंहों का बसेरा,
समुद्र तट पर है,नमक का ढेर-सारा ।
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पश्चिमी,दक्षिणी घाट का है घेरा---
मिर्च-मसाले,लौंग-इलायची,
चाय-काफी की,होती पैदावारा ।
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मातृभूमि के पैरों को,प्रकृति ने--
तीन सागरों ने,हिलोरों से,है पखारा,
कन्याकुमारी व रामेश्वर धाम न्यारा,
विवेकानन्द राँक,जहाँ दिखता प्यारा ।
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राजस्थान,राजपूतानों का,है बसेरा--
पहाड़ियों,स्थापत्यकला का जखीरा,
प्रकृतिक झील,खारे पानी का पोखरा,
प्रकृतिक सौंदर्य का अनूठा है,नजारा ।
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मध्य-भारत,प्रकृतिक छटा का बसेरा--
सघन वन,सतपुड़ा,विन्ध्यांचल,मैकाल,
पर्वत श्रृंखला का बहुमूल्य है घेरा,
भेड़ाघाट,चचई जलप्रपात का नजारा,
होता यहाँ,सैलानियों का अधिक फेरा।
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बस्तर-वादियों में,गुफाओं का बसेरा--
चित्रकोट,तिरथगढ़ जलप्रपात निखारा,
है,घने जंगलों व वन्यजीवों का है डेरा,
कन्द-मूल,जड़ी-बूटी का है,खूब ढ़ेरा ।
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जशपुर ,मैनपाट पठार का बसेरा--
बम्बलेश्वरी,कुंदरगढ़,दन्तेश्वरी ठौरा,
आस्था और विश्वास,पूजन का डेरा,
प्राचीन काल से,है इनका यहाँ बसेरा ।
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आओ हम तुम,प्रकृति की गोद में जायें
प्रकृतिक सौंदर्य की,अनुपम छटा के,
सघन वन,अभ्यारण,राष्ट्रीय पार्कों के,
इक बार,अवश्य ही,सैर-सपाटा करें,
मन में भी, ये अति -प्रसन्नता को लायें।
÷÷÷÷इति÷÷÷÷÷÷
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि प्रकृति की गोद में जलप्रपात एवं प्रकृतिक सौंदर्य का अनूठा खज़ाना है।जिसका हमें दर्शन करना चाहिए व इनसे मिलने वाले लाभों से लाभांवित होने की जरूरत है ।
--------==मौलिक रचना ====--------
Thursday, October 15, 2020
रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- प्राकृतिक छटा
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