निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला- रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा--मुक्त ।
शीर्षक:- "" परिवर्तन "" ।
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○○••••|परिवर्तन |••••○○
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समय चक्र का पहिया---
निरंतर घूमते रहता ,
काल समय,दिनाँक बदलते रहता ।
पौराणिक कथाओं में---
त्रेता,द्वापर व कलयुग,
ये हैं सब,काल समय की गणना ।
प्रकृति के स्वरुप में---
हुआ है,अनेकों बार परिवर्तन,
कहीं पर,भूखंडों का विभाजन,
तो,कहीं पर हिम-पर्वत का निर्माण,
तो कहीं पर,बदली नदियों की धारा ।
सुनामी,भूकंप व महामारी---
ला देती ,मानव जीवन के,
जीवनशैली में कई परिवर्तन ।
जीव-जन्तु,वनस्पति में---
आयु वृद्धि के साथ-साथ,
होते हैं,कई जैविक-विविधता,
रूपी प्राकृतिक बहु -परिवर्तन ।
वय-सन्धि के बयार में---
बचपन,जवानी और बुढ़ापा,
होती ,काया व क्रिया-कलापों में,
ढेरों, नैसर्गिक परिवर्तन ।
जो ,मानव परिवर्तन के साथ---
जीने का सामंजस्य स्थापित करता,
वही,इस भौतिक -जगत में,
अपने आपको,जीवित रख पाता ।
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व्याख्या:-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति के लिए परिवर्तन एक नैसर्गिक क्रिया-कलाप है ।इससे सभी लोगों को दो-चार होना पड़ता है ।
====मौलिक-प्रस्तुति =========
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