रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर ,छग
शीर्षक- *अमावस्या*
अलंकार-वाक्यार्थोपमा अलंकार
जीवन की यात्रा में कभी
आ जाये अमावस्या तो
घबराना मत ये राहगीर|
काले बादल काली घटा ही
घनघोर बारिश करवाते हैं
ज्यों नई आस यूं जगाते हैं|
अमावस्या के अंधेरे दुख में
जीना हमको सिखलाते हैं,
ज्योंअनुभव नया दे जाते हैं|
ज्यों हिम्मत करे इंसान तो
पर्वत देते हैं रास्ते मुश्किल में
अ़धेरे में जुगनू राह दिखाते हैं|
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर ,छग
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वाक्यार्थोपमा अलंकार-
1- ज्यों अनुभव नया दे जाते हैं|
2-ज्यों नई आस जगाते हैं|
3-ज्यों हिम्मत करे इंसान तो|
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