पेंडरवानी , बालोद,छत्तीसगढ़
विधा - मुक्त छंद
शीर्षक- हँसी एक रामबाण औषधि है
हँसी एक राम बान औषधि है
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हँसी की कोई भाषा नही ,
पर प्राण फूंक दे उनमें-जिनमें -
जीने की कोई आशा नही ,
हँसी , चेहरे का खिलना ,
होंठो की हरकत ,आँखों की चमक से ,
दिलों में असर करता है ,
बना देता है गैरों को अपना ,
गमों को बेअसर करता है ,
स्मित , मुस्कान ,अल्हड़ , खिलखिलाहट ,
दूर कर देता है मन में जो दुखों की आहट ,
बचपन की नादानी में ,
बेबाक कभी जवानी में ,
बुढ़ापे में क्यूं खो चला हँसी ,
जीवन की उलझन भारी कहानी में ,
दुख भी चेहरे से दिखता है ,
जो कुछ और कहानी लिखता है ,
पर हँसी की ताकत ज्यादा है ,
हो जाता गम जिससे आधा है ,
मानव तन बस चार दिनों का
इस फलसफे से तो जीवन सधी है ,
हरपल को जी लो मनभर के
हँसी एक रामबान औषधि है ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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