संबलपुर, जिला-कांकेर (छ ..ग.)
विधा :-गीत सृजन
शीर्षक :- *घनघोर घटाएं जब छाए*
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~ •°• *घन घोर घटायें*•°• ~
घन घोर घटायें जब छाए,
पिया मिलन की रूत आएं,
हौले-हौले जियरा डोले,
तन मन में अगन लगाएं।
राह नजर ना आएं,
सुध बुध भूल जाएं,
तुम्हरी सुधि बहकाएँ
मन मेरा घबराएं.....।
लम्हा-लम्हा युग सा लागे,
जब लगन मन में समाएं,
ए री सखि!मैं कैसे बोलूं
लाज मोहे अब आएं....।
नागिन सी ये रात पिया,
मोहे बिरहा सहा ना जाएं,
चूड़ी खनके,मन मेरा बहके
दिल मुश्किल में पड़ जाएं.....।
उमड़ घुमड़ के बादर आएं
गरज में जी डर जाएं,
रिमझिम-रिमझिम बरसे
बादर कारी घटा बल जब खाएं.....।
चम-चम,चम-चम बिजुरी चमके
बादर नाच दिखाएं,
गड़-गड़,गड़-गड़ बादर देखो
ढोल नगाड़े बजाएं....।
घन घोर घटायें जब छाएं,
पिया मिलन की रुत आएं,
हौले-हौले जियरा डोले,
तन मन में अगन लगाएं.।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में सावन की घटाओं का वर्णन किया गया है।सावन में विरहन की व्यथा, उमड़ते घुमड़ते बादलों का वर्णन, बिजली आदि का वर्णन किया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)
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