Thursday, September 3, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- शांति चेतना

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (दृष्टान्तअलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"शांति चेतना"
*****************************

बिन  वेदना   नहीं  आ  पाती  चेतना 
छाछ  को  भी  पड़  जाता है फूंकना 

दिव्य  पराकाष्ठा  की  अनुभूति   मिले 
जल-जल नित्य होती है जिसे संवेदना 

मझदार   में  डूबे   उसकी  नैया  जब
साथ नहीं दे पाता कभी कोई खिवैया 

पाकर  भी  सब  खो  देता  है   प्राणी 
रुक   जाते  हैं  पैर जब  पाकर छैंया 

व्यथित  मन का  बस एक ही उपाय 
माया छोड़  जब मन  प्रभु  में लगाय

ध्यान से हो जब आराध्य की आराधना
मिल  जाएगी  तब अपार शांति चेतना। 

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...