स्थान:-देवगॉव, बरमकेला
विधा:-छंद मुक्त कविता
शीर्षक:-"भगवान कहाँ से हो "
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कपड़े हो गये छोटे, शर्म कहाँ से हो ।
अनाज हो गये रासायनिक, स्वाद कहाँ से हो ।
भोजन हो गया डालडा, ताकत कहाँ से हो ।
नेता हुआ कुर्सी का,देशमुखी कहाँ से हो ।
फूल हुए प्लास्टिक के,ख़ुशबू कहाँ से हो ।
चेहरा हुआ मेकअप का,रूप कहाँ से हो ।
शिक्षक हुए ट्यूशन का,विद्या कहाँ से हो ।
प्रोग्राम हुए चैनल के,संस्कार कहाँ से हो ।
इन्सान हुआ पैसों का,दया कहाँ से हो
पानी हुआ केमिकल का,गंगाजल कहाँ से हो ।
संत हुए स्वार्थ के,सत्संग कहाँ से हो
भक्त हुए स्वार्थ के,भगवान कहाँ से हो।
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घनश्याम पटेल
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