स्थान- कचंदा
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा- मुक्तक कविता
शीर्षक- जाग री नारी
जाग री नारी
कब तलक सोयेगी , अब तो जाग री नारी ।
तुम्हीं से तो बनी, ये दुनिया सारी ।।
पलटा देगी दुनिया, तुझमें है इतना दम ।
बुद्धिवती है , बलवती है , नहीं किसी से कम ।।
तू ही तो जग जननी है, सृजन करना तेरा काम ।
तेरे इस पुनीत कर्म को , ईश्वर ने भी किया प्रणाम ।।
कुछ मुर्ख नादानों ने किया तेरा अति अपमान ।
अभिशाप कहा , अबला कहा और कहा अज्ञान ।।
किया तूने सदा सब्र , सहती रही संहार ।
पर कभी न आया , बदले का विचार ।।
देश तुम्हें पुकारे , आगे आओ जग महतारी ।
कर ले कोई काम नया , अब आयी तेरी बारी ।।
प्रगति की ओर , अब तो जा री नारी ।
बढ़ा देश को आगे , निभा अपनी भागीदारी ।।
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