Friday, September 4, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- प्रेम

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
      संबलपुर,  जिला -कांकेर (छ.ग.)
 विषय :- *वर्तमान परिपेक्ष्य और प्रेम* 
       (उदाहरण अलंकार का प्रयोग)
   
~~~~~~~~~~~~~~~~
         
          ~ *•°• *प्रेम*•°•* ~

प्रेम जीने का आधार,
आज बन गया ज्यौं व्यापार,
लगता आज के दौर में 
ज्यौं आकर्षक बाजार।

कहते थे सदा सारे 
वादों को निभाएंगे,
जिंदगी जैसे स्वर्ग हो 
वैसा हम बनाएंगे।

आज सपनों के महल ढह गए, 
वादे सारे मुकर गए,
कैसे बताएं जिंदगी के लिए 
ही कहर बन गए।

सतरंगी सपने सजे थे,
उपवन में खुशियों के 
फूल खिले थे,
लगता था ज्यौं जीवन में 
इंद्र धनुषी रंग भरे थे।

आँधियों का एक झोंका आया,
रिश्तों की बुनियाद हिलाया,
तेरी चाहतों की हसीं ख़ुश्बू 
जाने कहाँ गया समाया?

वस्ल की रात आने ही वाली थी 
काली घटाओं ने रोक लिया,
इस भाग दौड़ की जिंदगी ने स्वंय 
को साबित करने से बचा लिया।

प्रेम जीने का आधार,
आज बन गया ज्यौं व्यापार,
लगता आज के दौर में 
ज्यौं आकर्षक बाजार।

*उदाहरण अलंकार का प्रयोग*
1.आज बन गया ज्यौं व्यापार
2.आज के दौर में ज्यौं 
   आकर्षक बाजार।
3.जिंदगी जैसे स्वर्ग हो 
    वैसा बनाएंगे आदि।

      नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...