Monday, September 21, 2020

मीरा आर्ची चौहान जी की रचना- कहती है इंद्रावती

रचयिता- मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर ,छग
विषय-नदी
शीर्षक-कहती है इन्द्रावती
विधा- कविता (मुक्त छंद)

बस्तर की गोद में
उछल -उछल कर
रात-दिन हँस-हँस 
खूब खेला करती
है इन्द्रावती|

थोड़ा- सा नाँच थिरक,
इतरा कर चलती|
नटखट मचलती
 है इन्द्रावती|

दूर -दूर तक फैली
हरी भरी मनभावन
 वादियों के बीच
बहती है इन्द्रावती|

कभी किसी
 कंदरा में
कभी किसी
 प्रस्तर पर
पलभर नन्हें से
मृगछौने -सा लुक
 छिपकर और फिर
हौले-हौले लंबी 
छलांगे भरती 
है इन्द्ररावती|

कितनी चट्टाने 
तोड़ -तोड़
बाधायें पार कर
बहती ही रहती है|

नही घबराती है
कभी किसी
 मुसीबत से,
न ही किसी 
संकट से डरती
है *इन्द्रावती||*

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर छग

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...