Tuesday, September 8, 2020

सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- बेटी

रचनाकार  सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला  बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा  कविता

शीर्षक   बेटी हूं मैं

            बेटी हूं मैं
बेटी हूं मैं बेटी हूं, भारत माता की बेटी हूं।

ना ही हिन्दू, ना ही मुस्लिम, ना मै सिक्ख, ईसाई हूं।

बेटी हूं मैं बेटी हूं, भारत भूमि की बेटी हूं।

क्यों कमतर मुझे आंका जाता, बेटों से नीचा क्यूं दिखाया जाता?

क्या अपराध किया मैंने? क्यों कोख़ में मारी जाती हूं?

गलियों में अकेले जाना माना, सड़कों से गुजरना मुश्किल क्यों?

क्यों इज्ज़त नहीं है मेरा यहां? क्या यह देश मेरा अपना नहीं?

अख़बार कोई भी उठा लो रोज, मेरी इज्जत बिखरी मिलती है।

कहीं निर्भया,कहीं शबाना, कहीं रानो, कहीं रीटा पल पल मरती है।

क्यों कदम नहीं उठ रहे कठोर? क्यों नहीं कठोर कानून बने?

क्या हमें जीने का अधिकार नहीं? क्या आजादी बेटों की ही अमानत है।

जो आजादी जी रहे हैं बेटे आज, उसमें बेटियों का बलिदान कमतर तो नहीं।

फिर क्यों लिंगभेद का नाम देकर हमें सरेराह सताया जाता है।

सुन लो समस्त विश्व के बेटों तुम, गर बेटे होने का गुमान होगा।

जिस कोख ने तुमको जन्म दिया, वहीं तुम्हारा अस्तित्व मिटा देगी!!!

       सूर्य प्रकाश पाटिल

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