जिला-कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक-" नीड़ की पंछी"
प्रस्तुत है कविता-
नीड़ की ऐसी पंछी है तू ,
पर लगते ही उड़ जाती है ।
पर लगते परवाज को जब ; आकाश उन्हें मिल जाता है,
धरा तुम्हारी गगन तुम्हारा ये उसको समझाया जाता है ।
सूर्य अस्त होने से पहले नीड़ में वापस आ जाना ये सबक उसे दिया जाता है,
कैसे समझाऊँ तुम्हे ये बात लाडली !
तू ऐसी परवाज है ,
पर लगेगी जिस दिन तुमको फिर शाम कभी न आने पाऐ
फिर शाम कभी न आने पाऐ ।
गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
बहुत सुंदर रचना।🎉🎉🎉🌹
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना दीदी 👌👌🌹🌹
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteबहुत बढ़िया रचना है आपकी आपको
ReplyDeleteGreat
ReplyDeleteबेहद आभार
ReplyDeleteशानदार और बहुत सुंदर रचना👌👌
ReplyDeleteवाह बहुत सुंदर रचना👍👍👍
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteबहुत अच्छा दीदी
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