Monday, September 14, 2020

पदमा साहू कृत आलेख- हिन्दी

रचनाकार श्रीमती पदमा साहू
 खैरागढ़ जिला राजनांदगांव
विधा ,,,,आलेख
विषय,,, हिंदी का उद्भव व विकास एवं वर्तमान स्थिति।
 हिंदी भाषा का उद्भव और विकास_  हिंदी भाषा का उद्भव बहुत ही प्राचीन काल से है।प्राचीन काल में हमारी सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता से थी और उसी सिंधु से ही हिंदी भाषा की निष्पत्ति हुई है।
हमारी प्राचीन भाषा संस्कृत थी और हिंदी भाषा को संस्कृत भाषा की पुत्री कहा जाता है अर्थात हमारी भाषा हिंदी जिनका जन्म हुआ है इनकी जननी संस्कृत भाषा है तभी तो प्राचीन काल में रामायण, महाभारत, मेघदूत जैसे बड़े-बड़े महाकाव्य संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं । तत्पश्चात कालांतर में धीरे-धीरे यह अपभ्रंश होते गया और इसका एक रूप आ गया *पालि* जिसे प्राकृत रूप कहते हैं पालि भाषा अपभ्रंश भाषा इसी अपभ्रंश भाषा से प्राकृत भाषा से ही हिंदी भाषा का उद्भव हुआ और लगभग 500 से 1000 वर्ष तक पश्चिमी व पूर्वी अपभ्रंश से ही हिंदी का जन्म हुआ इस तरह से हिंदी भाषा का उद्भव हुआ और धीरे-धीरे इनका विकास होते गया और सभी कि यह संविधान में मांग थी कि हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाया जाए तब 14 सितंबर 1949 को अनुच्छेद 343 के अनुसार हिंदी राजभाषा एवं उनकी लिपि देवनागरी लिपि बनी। हमारे देश में बहुत सारे भाषाओं का सम्मिश्रण है इसी कारण हमारे भारत देश को बहुभाषी देश कहा जाता है यहां पर अनेक जब हिंदी का उद्भव हुआ तो हिंदी के साहित्यकारों द्वारा हिंदी में रचनाओं का सृजन करने का युग प्रारंभ हुआ हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने के लिए 1971 में भरूच से महात्मा गांधी जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में हिंदी  को राष्ट्रभाषा अपनाये जाने के हेतु अभिव्यक्ति दिया  क्योंकि हिंदी अधिकांश भारतीयों द्वारा बोली जाती है इस तरह से हिंदी भाषा हमारे देश में अपने अस्तित्व पर आई।
 *हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति__* हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति विकास की ओर अग्रसर हो रही है क्योंकि संविधान के द्वारा जब हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया तब से लेकर बड़े-बड़े कार्यालयों में और कानूनी भाषा में भी हिंदी का प्रयोग होने लगा। हिंदी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, गुजरात, राजस्थान , हिमाचल प्रदेश इन प्रदेशों में बोली जाने वाली भाषा है इसलिए इनका विकास उत्तरोत्तर होते जा रहा है और हर क्षेत्र में हिंदी को एक नया आयाम मिलते जा रहा है । अखबारों में हो चाहे न्यूज़ के रूप में कमेंट्री करने का हो, खेल के क्षेत्र में हो कि किसी भी क्षेत्र में हो लोगों द्वारा हिंदी को सम्मानजनक रूप से अपना कर इनका प्रयोग किया जा रहा है और इनका विकास उत्तरोत्तर एक नई दिशा की ओर बढ़ते जा रहा है इसी कारण तो *हिंदी को भारत की आत्मा* कहा जाता है जो हमारे लिए बहुत ही गौरव की बात है।
रचनाकार श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

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