Monday, September 14, 2020

अनुरमा शुक्ला कृत आलेख- हिन्दी हमारी पहचान

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान - दुर्ग( छ.ग.)
विधा- आलेख
शीर्षक-
 *हिन्दी हमारी पहचान*

विचारों को सहजता से अभिव्यक्त करने का माध्यम  भाषा या बोली होती है,सभी भाषाओं में सबसे सरल हमारी हिन्दी तथा उसकी बोलियाँ है। यह देवनागरी लिपी में लिखी जाती है,हिन्दी विश्व की एक प्रमुख भाषा है, संवैधानिक रुप से हमारे देश की *राजभाषा* तथा भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हिन्दी भाषा की यह विशेषता है कि इसमें निर्जीव वस्तुओं के लिये भी लिंग का निर्धारण होता है ।
         हिन्दी के अधिकतम शब्द संस्कृत अरबी और फारसी भाषा से लिये गये हैं इसलिये इस भाषा को *संबंध भाषा* के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दी भाषा का इतिहास लगभग १००० वर्ष पुराना माना गया है, सन् १९९८ के पूर्व मातृभाषियों की संख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं के जो आँकड़े मिलते थे उनमें हिन्दी को तीसरा स्थान दिया जाता था, सन् २००१ की जनगणना के अनुसार लगभग २५.७९ करोड़ भारतीय हिंदी का उपयोग मातृभाषा के रुप में करते हैं, जबकि लगभग ४२.२० करोड़ लोग इसकी ५० से अधिक बोलियों में से एक का इस्तेमाल करते हैं।
हिन्दी भाषा के विकास का सही अनुक्रम है- संस्कृत- पालि-प्राकृत-अपभ्रंश-प्राचीन हिन्दी-मध्यकालीन हिन्दी-आधुनिक हिन्दी ।
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा १९१७ में भरुच (गुजरात) में सर्वप्रथम राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता प्रदान की गई थी, तत्पश्चात १४ सितंबर १९४९ को संविधान सभा ने एकमत से हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिये जाने का निर्णय लिया तथा १९५० में संविधान के अनुच्छेद ३४३(१) के द्वारा हिन्दी को देवनागरी लिपी में राजभाषा का दर्जा दिया गया ।
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,वर्धा के अनुरोध पर १९५३ से १४ सितंबर को हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाता है।

आधुनिक काल को हिन्दी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ युग माना जाता है जिसमें पद्य के साथ-साथ गद्य, समालोचना, कहानी, नाटक, पत्रकारिता का भी विकास हुआ ।

अब हमारा दायित्व है कि हम अपने देश के सम्मान में हिन्दी को हर कार्य में अपनायें तथा नयी पीढ़ी जो आधुनिक बनने की चाह में अंग्रेजी का अधिक उपयोग करने लगी है, उन्हे हिन्दी का महत्व बतायें तथा अपने देश की पहचान से अवगत करायें ।

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