Saturday, September 19, 2020

मीरा आर्ची चौहान की रचना- सड़कें

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर छग
शीर्षक-सड़कें
विधा-कविता (मुक्त छंद)

सड़के लंबी -लंबी पगडंडियों के बीच वीरान  
जंगलों में भी शांत
मंजिल का पता बता जाती हैं|

कहीं ठोकरें तो कहीं  हादसा से
रक्त रंजीत ऊबड़ -खाबड़  रहती
पर  राही को राह दिखाती ही हैं|

अपनी व्यथा किससे कहें रोज ही
हो रहे दर्दनाक मौत की साक्षात
मूक गवाह  होती हैं ये ही सड़के|

आज कल ये कागजों पर बनती हैं
शहर-शहर गाँव- गाँव  अपनी ही
दुख से पिघलती मौन हैं   सड़के|

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर छग
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