स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला-जांजगीर-चाम्पा छत्तीसगढ़
विधा-कविता
विषय-सड़कों की जय जयकार
खुले मन से सड़कों की मैं, तारीफ करता हूं ।
जिनके सहयोग से ही , मंजिल तक पहुंचता हूं ।
इन्हें मित्र कहने में, मुझे लाज नहीं संकोच ।
इनके बदौलत सफर,सहज हुआ कई कोस ।
जैसे लोग देव पूजते, मैं इसको पूजता हूं ।
सड़कों पर दुर्घटनाएं होती,लोग मर तक जाते ।
सड़क का इसमें क्या दोष ,उस पर उंगली उठाते ।
दुसरों का मैं नहीं जानता ,होश हवास से चलता हूं ।
सड़क विहीन जहां गांव है, और वहां के बासिंदे ।
उनकी हालत जाकर देखो,पूछो सोये है चैन की नींदें ।
उनके दुख देखकर मैं, पूछने की हिम्मत नहीं करता हूं ।
सुबह-शाम उन्हें पायेंगे,हरदम सड़क की रट लगाते ।
कब बनेगा कैसे बनेगा कौन बनायेगा,यही गीत है गाते ।
ऐसे ही कई क्षेत्रों की हालत,रोज अखबार में पढ़ता हूं ।
सड़क नहीं यह सुख का द्वार,करलो इसकी जय जयकार ।
इसकी सुरक्षा तुम्हारी सुरक्षा, है यह भी जीने का उपहार ।
सड़कों का जग में जाल बिछे, ईश्वर से प्रार्थना करता हूं ।
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