जिला :- महासमुन्द
विषय :- जीवन और वर्तमान की चुनौतियाँ
विधा :- आलेख
शीर्षक :- बेरोजगारी और महामारी में उलझी जिन्दगी
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कहते हैं सुख और दुख जीवन रूपी सिक्के के दो पहलू हैं, जिनका साथ - साथ होना स्वाभाविक है। परन्तु मानव मन अक्सर यहीं कामना करता है कि उसके जीवन की पगडंडी एकदम ही सुगम हो, जहाँ उसे हमेशा अच्छे पक्ष के भोग का अवसर मिलता रहे। पर इन सब से परे अक्सर मनुष्य को उसके इच्छा अनुरूप कार्य नहीं मिल पाता है, और वह अपनी तकदीर को कोसते हुए अपने जीवन के सुखों को अच्छे से नहीं भोग पाता।
वर्तमान परिदृश्य में अगर हम देखें तो युवा वर्ग के जीवन में अच्छे रोजगार पाना एक बहुत बड़ी चुनौती है। और उससे भी बड़ी चुनौती है उस कार्य में अपने तन, मन और लगन से लग जाना। साथ ही उक्त रोजगार से हो रहे आय से संतुष्टि को प्राप्त करना। खैर इन सब बातों को तो फिर भी हम अपने दृढ़ इच्छाशक्ति से प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ ऐसी हैं, जिनके कारण का निवारण हमारी व्यक्तिगत क्षमता से दूर है। जैसे आज हम देखें तो कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी से पूरा विश्व लड़ रहा है, लेकिन भयवश काम - धंधा चौपट हो गया है, और युवा वर्ग बेरोजगार होकर एक नए काम की तलाश में है। अपने जीवन की आम जरूरतों को पूरा करने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार है। और ऐसी ही परिस्थितियों में बुरे संगत में पड़ जाने से समाज में अपराध का जन्म होता है।
ऐसे परिस्थिति में अगर हम सार तत्व में कहें तो युवा पीढ़ी के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कैसे उन्हें अच्छा रोजगार मिले, व किस तरह से वह महामारी के इस दौर में गलत संगति से परे अपने मन में सकारात्मक भाव जगा सके। और यहीं एक जरिया है जिसके माध्यम से हम जीवन में आए बेरोजगारी के उलझनो को सुलझा सकते हैं।
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