Thursday, September 17, 2020

कु.गरिमा पोयाम कृत आलेख- जीवन में विवेक

लेखिका:-कु.गरिमा पोयाम
निवासी:-कांकेर(छ. ग.)
विधा:-आलेख
शीर्षक:-"जीवन में विवेक का न होना"
            ऐसा जरूरी नहीं कि आप पढ़े लिखे नहीं तो आपके पास विवेक नहीं होगा और ये भी जरूरी नहीं कि आप पढ़े लिखे हो तो आपके पास विवेक होगा।फिर भी मैं अपने अनुभव के आधार पर ये लेख लिख रही हूँ।जो मेरी सोच के दायरे तक सीमित है और आपकी सोच के अनुसार गलत हो सकते हैं और मैं सम्मान करती हूँ आपकी सोच के दायरे का।अगर हमारे पास विवेक नहीं तो हम जीवन की परेशानियों का सामना नहीं कर पाएंगे और अपने साथ दूसरों के लिए भी परेशानियां खड़ी करेंगे।मैंने गांव और शहर दोनों के माहौल को महसूस किया है।मैंने गांव के लोगों में विवेक की कमी की अधिकता देखी है,शहर की अपेक्षा।गाँव में यदि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से कहे कि-"तुमने सुना ये घटना ऐसी है।"तो दूसरा व्यक्ति आसानी से यकीन कर लेता है और बिना पड़ताल किये ग्यारह,बारह लोगों तक वो बात फैलाता है।बारहवें व्यक्ति तक पहुँच कर वो बात नया मोड़ ले चुकी होती है।
               अगर शहर में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से ये बात कहे कि-"तुमने सुना ये घटना ऐसी है।"तो दूसरा व्यक्ति पहले व्यक्ति से पूछेगा-तुम्हें कैसे पता,क्या सबूत है,मैं कैसे मान लूं.......।इस तरह या तो वो विश्वास नहीं करेगा,अनदेखा करेगा या खुद पड़ताल करेगा।अपने तर्क की कसौटी पर परखेगा और जब वो संतुष्ट हो जाएगा।तभी यकीन करेगा।ये मेरे अपने विचार हैं जो आपको सही या गलत लग सकते हैं।गांव के कई सारे सकारात्मक पक्ष हैं मैंने इस लेख में नकारात्मक पक्ष दिखाने की कोशिश की है ।
                            -कु.गरिमा पोयाम
                               कांकेर(छ. ग.)

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