Wednesday, September 2, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- बाढ़ और सूखा

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा कविता
शीर्षक बाढ़ और सूखा


   बाढ़ और सूखा
मेघ प्रतिवर्ष आते हैं,
         अपना कर्तव्य निभाते हैं।
पर सभ्य मानव की सोची समझी अज्ञानता वश,
           कहीं सूखा, कही बाढ़ प्रतिवर्ष आते हैं।
और चालक मानव इसे,
        प्राकृतिक आपदा बताते हैं।
क्या चांद, अंतरिक्ष पर गए मानव?
             आपदा की वज़ह नहीं जानते।
पर आज के सभ्य मानव के लिए,
         गलती थोपना कोई बड़ी बात नहीं।
प्रतिवर्ष पेड़ो की,
               कटाई जारी हैं।
वृक्षारोपण के नाम पर,
           फर्जीवाड़ा भी जारी है।
ऐसे में कहीं सूखा पड़ जाए,
          या आ जाए बाढ़।
तो ऊपर बैठे लोग प्राकृतिक आपदा,
            बताकर सर्वेक्षण अनुदानकी बात कहते हैं।
लाखों लोग हर वर्ष बेघर हुए,
         लाखों बेमौत मरे।
फिर भी अपना पल्ला झाड़ के लोग,
          प्रकृति पर दोष लगाते हैं..
 सूर्य प्रकाश पाटिल

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