शीर्षक :व्यथा पेड़ की
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
निवास स्थान :- सम्बलपुर ओड़िशा
व्यथा पेड़ की
सुनो मेरी व्यथा आज सुनाता हूं।
मैं पेड़ हूं हर हाल में मुस्कुराकर लहराता हूं ।
निस्तब्ध खड़ा हूं, तुम्हारे जीवन की बागडोर थामें।
प्राणवायु देकर तुम्हें, तुम्हारा जहर मैं पी जाता हूं ।
नि: स्वार्थ खड़ा हूं,सेवा को तुम्हारी
अपना अस्तित्व देकर तुम्हें, कितने काम आता हूं।
मैं ही तो हूं जो वसुधा को स्वर्ग बनाता हूं।
पर मेरा दर्द तुम्हें दिखाई नहीं देता।
मेरा बेजुबान पुकार तुम्हें सुनाई नहीं देता।
काटे जा रहे हो मुझे स्वार्थ में लीन होकर
एक मन है तुम्हारे पास,क्या वह तुम्हें दुहाई नहीं देता।
दर्द होता है मुझे भी अपार पर मैं सह जाता हूं ।
आंखों में लिए आंसू मैं सहम जाता हूं ।
मैं पेड़ हूं हर हाल में मुस्कुराकर लहराता हूं।
मत भूलो इंसान, मत करो अपनी बुद्धि पर अभिमान मैं ना रहा तो यह जग बन जाएगा शमशान ।
माना आज तुम पैसे बहुत कमाओगे।
कर दोगे विनाश मेरा तो सांस कहां से लाओगे ।
तुम्हारी ही खुशियों के लिए तुम्हारे आगे झोली फैलाता हूं।
मैं पेड़ हो हर हाल में मुस्कुराकर लहराता हूं |
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