*जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)*
*शीर्षक - " विवाह- एक वादा "*
*विधा - छंदमुक्त कविता*
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बाबुल की परी थी मैं,
अब अर्धांगिनी तुम्हारी हो गई हूं।
साथ जीने की कसम खाई है हमने,
साथ चलने को राजी हो गई हूं।।
आपसे ही शुरू मेरी दुनिया,
गुजारा आपके राशन से होगा।
डोली जा रही साथ आपके,
अंतिम विदाई आपके आँगन से होगा।।
साथ चलना हमेशा मेरे,
ना बदलना तुम मौसम की तरह।
ख्याल रखूंगी मैं भी आपका,
हो न जाना आप कभी बेपरवाह।।
सदा बनना हमदर्द मेरे,
सम्मान मेरी ना जाने देना।
विश्वास रखना हमेशा मुझ पर,
गलतफहमियों का नकाब न आने देना।।
रूठ जाऊं कभी मैं आपसे तो,
प्यार से मुझे मना लेना।
रब से मांगा है मैंने तुमको,
रब तुम हो मेरे,
ये रब को भी बतला देना।।
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