जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा कविता
शीर्षक विश्व कल्याण
विश्व कल्याण
कार्य ऐसा कीजिए, भला किसी का हो जाए।
उसका तन मन तर जाए, अपना भी तर जाए।
शांति चेतना ही मार्ग है, जामे विश्व कल्याण समाए।
शांति मार्ग पर चलकर ही मानव, सारे सद्गति पाए।
आज भाग रहा हैं मानव , मायाजाल में पड़ कर।
कल को शांति को तरसेगा, भटकेगा दर दर।
जब तक मानव समझ ना जाए, आत्मशाध यह न कर ले।
खाली हाथ जग आया था, खाली हाथ ही जाना।
तभी शांति के मार्ग खुलेंगे, मायाजाल मिटेंगे।
शांति चेतना ही मार्ग है ऐसा, जामे विश्व कल्याण समाए....
सूर्य प्रकाश पाटिल
उत्कृष्ट लेख 👌👌
ReplyDeleteबेहतरीन लेख 👍👍👍
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