जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विधा - दोहा छंद
अलंकार - दृष्टांत अलंकार
शीर्षक - शांति और चेतना
सुखमय जीवन के लिए ,
मन में गहरी शांति ।
ज्यों सागर की तली में ,
मौन सहित विश्रांति ।।
मन की शांति आवश्यक ,
जीवन के सफर में ।
आती है निश्चिन्तता ,
खुशी उर - अंतर में ।।
मन इन्द्रिय मस्तिष्क में ,
क्रियाशील चेतना ।
जैसे बिजली यन्त्र को ,
देती है प्रेरणा ।।
प्रभु-भजन अध्यात्म योग ,
ध्यान और सत्संग ।
चेतना को पुष्ट करे ,
शांति भी सहज सुगम ।।
शांति और चेतना ही ,
विश्वशांति का जनक ।
मानवता मुस्कायेगी ,
राम राज्य की झलक ।।
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