Thursday, September 3, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- शांति

 नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा- कविता ( दृष्टांत अलंकार पर आधारित )
शीर्षक --शांति चेतना
व्याख्या ---कवि के द्वारा  जीवन में काम आने वाले महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया गया है ।
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         शांति चेतना
शांति जीवन का, सबसे बड़ा है धन ।
संग्रह इसका करते रहें,सभी जन जन ।

सज्जनों की संगति, जीवन में वाह वाह ।
दुर्जनों की संगति, जीवन में आह आह ।

  सत्य की राह हमेशा,सुखद -सुखद ।
असत्य की राह, हमेशा दुखद -दुखद ।

अविद्या से मन को,रख दूर -दूर ।
विद्या से मन को,रख पास -पास ।

अंधेरा मिटाने के लिए,दीप  जला ।
कर भला तो ,हो जग में  भी भला ।

    मित्रता कांटों से,की नहीं जाती ।
फूलों की मित्रता से , दुःख नहीं आती ।

   मधुर तराने मन को, हमारे भा जाते हैं ।
इसलिए कोयल याद रहते,कौआ भूल जाते हैं ।

सागर की आस रखिए, जहां जल ही जल ।
नदी का क्या आज है,पता नहीं रहे कल ।

मेहनत के फल मीठे,सदा ध्यान दीजिए ।
   मुफ्त के फलों से,बच बचके चलिए ।

जीवन में धन संग्रह, आवश्यक और जरुरी ।
  सपनों में भी कभी न रहिए, बनाकर दूरी ।

दूसरों के दुखों को, मिटाना सीखीए ।
भटके हुए को राह, दिखाना सीखिए ।

गिरधारी लाल चौहान

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