लेखिका सीमा साहू
सुभाष नगर दुर्ग जिला दुर्ग
विषय- समाज सेवा
समाज सेवा
प्रत्येक समाज अपने विकास हेतु कुछ संस्थाओं का गठन करता है।और अपनी सामूहिक प्रयास द्वारा समाज विकास के कार्य को आगे बढ़ाता है। विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो कभी रुकती नहीं अतः सामाजिक संस्थाएं कभी मिटती नहीं। समय के साथ साथ संस्थाओं के स्वरूप में, उनके कार्यों में परिवर्तन परिमार्जन होता रहता है, क्योंकि परिस्थितियां जो कल थी वह आज नहीं रहती है।संस्थाओं द्वारा किए गए कार्य उचित है या अनुचित इसका मूल्यांकन भी परिस्थिति एवं समय के अनुसार होता है आज का सामाजिक विकास कल की निव पर खड़ा है। हम और हमारा समाज विकास के जिस सीढ़ी पर खड़ा है। वह भूतकाल में हमारे पूर्वजों द्वारा किए गए प्रतिफल है ,उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत आज हमारी पुण्य का प्रताप है ।जिसके सहारे हम विकास के इस क्रम को आगे बढ़ा रहे हैं अतीत को भूलना नहीं, उससे सबक ना लेना एक आत्मघाती कदम होगा।
मनुष्य आज कुछ अधिक व्यक्तिवादी हो गया है इसमें पूर्व से सामूहिक विचार एवं चिंतन का अभाव है अतः समाज में पहले जैसी एकजुटता दिखाई नहीं देती।आज यहा गुटबाजी है दूसरे और समाज विकास की प्रक्रिया अधिक जटिल एवं स्वयंसेवी होती है ,जिसका मुकाबला करने हेतु अघिक एकजुटता सदस्यों में अधिक सामूहिक भावना की आवश्यकता है। सामाजिक संस्थाएं स्वयंसेवी होते हैं जिसके सदस्य एवं पदाधिकारी को देना ही होता है ,लेना नहीं उन्हें समय देना है श्रम, शक्ति एवं अर्थ गवाना है।बदले में प्राप्ति कुछ भी नहीं आता ऐसी संस्थाओं के प्रति आकर्षण कम होता है रुचि नहीं होती राजनीतिक संस्थाओं में स्थिति दूसरी है वहां सत्ता का सुख आय के स्त्रोत है ,अतः वह आकर्षण अधिक है लोग वहां जुड़ जाते हैं आजकल सामाजिक संस्थाओं में बहुत से लोग इसलिए भी जुड़ जाते हैं जिसे उनकी राजनीतिक लाभ मिल सके हमारी संस्थाएं इन परिस्थितियों से जूझ रही है उनके पास अर्थ का अभाव है ।
आजकल मंचीय कार्यक्रम होने लगा है, मंची कार्यक्रम में राजनीतिक नेताओं का सम्मान इसलिए किया जा रहा है कि, वहां से हमें लाभ मिल सके कभी-कभी यह देखने को मिलता है कि नेताओं से प्राप्त धन से अधिक धन हम आयोजनों में खर्च कर रहे हैं। यह मात्र मुझे दिखावा लगता है। समाज में संगठन तभी संभव है जब हम लोग एकता बनाए रखें, सामाजस्य बनाए रखें।
समाज में अपना दायित्व नम्रता और सेवा भाव के साथ निभाए। आज के युग में संगठन की शक्ति होना अनिवार्य है, चाहे व युवा शक्ति हो नारी शक्ति हो, हमें अपने सामाजिक दायित्व को निभाना चाहिए योगदान देना चाहिए ।
मैं समाज में देखती हूं, कि समाज अब राजनीतिक हो चला है, जो जिस पार्टी की हो उसको पद दिया जाता है,और जो समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं ,वह करते ही चले जाते हैं।
सामाजिक संगठनों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ना बहुत जरूरी है।आखिर हमारा संगठन जातीय संगठन ना होकर राष्ट्रीय मुख्यधारा का एक घटक होना चाहिए,हमें समाज तक सीमित नहीं रहना है ,हमें राष्ट्र के लिए कुछ करना होगा, साहित्य, समाज, राष्ट्र सभी हमारे अपने हैं, हमें सभी का सहयोग और सम्मान करना होगा।
इस भयंकर महामारी में राष्ट् के लिए सहयोग करना होगा।
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