रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-आलेख
विषय-जीवन के उत्तर-चढाव
शीर्षक- दृष्टिकोण
एक सिक्के के दो पहलू सा ही जीवन में उतार -चढ़ाव होते हैं ।समय सर्वदा एक सा नही होता कभी खुशियों के रंग दिखाता है तो कभी जीवन में अंधेरा छा जाता है।मनुष्य को परिस्थितियों से घबराना नही चाहिए और दोनों परिस्थितियों में तटस्थ रहना चाहिए।
वर्तमान में युवा पीढ़ी के पास सहनशीलता जैसे रह ही नही गई है छोटी-छोटी बातों पर ही वो निराश और हताश हो जाते हैं।अगर प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ना कर पाएं ,प्रेम में धोखा मिल जाये या गलत संगति में पड़ जाए तो वे आत्महत्या जैसा बड़ा कदम तक उठा लेते हैं ये भी नही सोचते कि जीवन मे जीवन से बड़ा और कुछ नही होता।
जीवन के जैसे ही सुख और दुख भी हमेशा नही रहते ।समय सदैव बदलता रहता है और परिस्थितिया
भी ।हमे आशावादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए खुद को परिस्थितियों से लड़ने और हार या जीत को एक समान भाव से ग्रहण करने के योग्य बनाना चाहिए।स्कूलों में भी बच्चों को आशावादी तथा सकारात्मक बनने की शिक्षा देनी चाहिए।
ऐसी कोई समस्या नही जिसका समाधान न हो
बस आवश्यक है हमें खुद को मजबूत बनाने की और उतार-चढाव में अडिग रहने की।ख़ासकर इस कोरोना काल मे निराशा को छोड़कर आशावादी दृष्टिकोण अपनाने की।
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