Thursday, September 17, 2020

पुष्पा पटनायक कृत आलेख- मानव का सफर

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा-आलेख
शीर्षक -"मानव का चुनौतीपूर्ण सफर"
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       प्रत्येक जीव चाहे वह किसी भी योनि में जन्म लिया हो जीवन की चुनौतियों से जूझता है ।जीवन की पहचान ही चुनौतीपूर्ण रास्ते पर चलकर होती है ।मानव जीवन की परिकल्पना बिना चुनौतीपूर्ण सफर के परिलक्षित हो ही नहीं सकती।
              आदिमानव काल से ही ज्ञात है कि मानव ने विकास की राह पकड़ी और वह अन्य प्राणियों से खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में सफल रहा। धीरे धीरे वह उन तमाम संघर्षों को बड़े सरल ढंग से जीतता रहा जो उसके जीवन मे आती रहीं।
              वर्तमान की बात करें तो मानव समाज खुद के बनाए इस कृत्रिम तंत्र में फंसता चला जा रहा है वह प्रकृति के अनुचित दोहन के परिणाम को भुगतने के लिए बाध्य हैं। जिस संसार में उसने सुख सुविधा के लिए निर्माण प्रक्रिया को अपनी चरम पराकाष्ठा तक पहुंचाया, अब वही उसके पतन का सबब बन रही है ।सुविधाओं के अंबार में वह दबता चला जा रहा है ।उसने ही पृथ्वी को अपनी -अपनी भूमि सीमा में बांधा और उसे आज पार करके अपनी ताकत दिखाना चाह रहा है ।जिसके लिए उसने हथियारों का साजो समान तैयार किया है ।पर मानव की हर एक भूल की कीमत कोई और नहीं स्वयं मानव ही चुकाएगा । यह बात समझ कर भी अनजान बनना उसे एक दिन बहुत महंगा पड़ने वाला है।
             वर्तमान समय की एक सबसे बड़ी चुनौती कोरोना महामारी की बात ही ले लीजिए प्रयोगशाला में खेला गया एक खेल विश्व में तहलका मचा रहा है दूसरों के लिए खोदे गड्ढे में खोदने वाला भी एक दिन अवश्य समायेगा, भले अभी पता ना चले पर धीरे-धीरे पता चल ही जाएगा ।
           प्रकृति चुपचाप रहते हुए भी अपना बदला ले ही लेगी उसकी नजर सब पर होती है उसे बांध कर रख पाना या  परास्त कर पाना  मानव के बस की बात नहीं ।ये बात मानव प्रलय से पहले समझ जाए तो बेहतर होगा।

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