Thursday, September 17, 2020

उर्मिला सिदार कृत आलेख- जीवन और वर्तमान

लेखिका- उर्मिला सिदार                   
 जिला:-  रायगढ़(छग)
लेख शीर्षक :- जीवन और वर्तमान की चुनौती


*जीवन और वर्तमान की चुनौती*
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वर्तमान में मानव कि जीने की शैली अत्यधिक जटिल है इस जटिल जिंदगी से हर मनुष्य निजात पाना चाहता है अर्थात सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाना चाहता है।वर्तमान में दो प्रकार के मानव समाज में दृष्टव्य  हैं।
(1)साधन विहीन दुःखी दरिद्र 
(2)साधन संपन्न दुःखी दरिद्र
इस तरह से समाज में गरीब और अमीर दोनों दुःखी हैं ।गरीब के पास भौतिक वस्तु और ज्ञान दोनों की कमी अर्थात वस्तु का अभाव और अज्ञानता दोनों की कमी से गरीब दुःखी है।इसी तरह अमीर के पास भौतिक वस्तु की कमी नहीं है ,ज्ञान की कमी है अतः अमीरों में और -और की संभावना हर पल बनी रहती हैं। संतुष्टि नहीं होता संग्रह मानसिकता से दुःखी रहता है।इस तरह वर्तमान समाज में गरीब और अमीर दोनों दुःखी हैं। जबकि मनुष्य दुःखी होकर जीना नहीं चाहता ।मनुष्य की मूल कामना सुखी होकर जीना है। लेकिन अज्ञानता के कारण दुःखी है।सुख की चाहत बनी  हुई है। लेकिन सुख पूर्वक कैसे जिया जाए इसकी पहचान नहीं है अतः मनुष्य का जीवन दुःख और सुख की झूला में झूलता नजर समाज में आता है। वर्तमान में मनुष्य की चुनौती रोजगार को कहा जा रहा है।लेकिन मूलतः देखा जाए तो धरती में संसाधन की कमी नहीं है। समझ की कमी है समझ ना होने के कारण मनुष्य श्रम का सम्मान नहीं कर पा रहा है । सब नौकरी की तलाश में ही पढ़ाई को लक्ष्य बना कर पढ़ते हैं। पूरी दुनिया नौकरी, पैसे के लिए करेगी तो शरीर की पोषण पैसों से नहीं वस्तु से होती है। यहीअंतर को मनुष्य समझ नहीं पा रहा है और वास्तविकता को ना समझ कर पैसा के पीछे भाग रहे हैं। यही सभी का समस्या का कारण है। वास्तविकता समझ आने पर ही मनुष्य सही समझकर व्यवहार कार्य सही कर पाएंगे। 
वर्तमान चुनौतियां मेरे विचार में आचरण अर्थात अस्तित्व की व्यवस्था को समझना ही वर्तमान चुनौतियां हैं। शिक्षा का मूल उद्देश्य मनुष्य को आचरण से पहचान कराना होता है। आचरण ही मनुष्य की सत्व है। मानवीय आचरण से ही मनुष्य सही कार्य व्यवहार कर संसार में सुख पूर्वक जी सकता है। अतः वर्तमान समाज में शिक्षा के माध्यम से चेतना विकास मूल्य शिक्षा का होना समिचिन आवश्यकता है।
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