Tuesday, September 8, 2020

सावित्री यादव "सावि " की रचना- विधाता

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
                बिलासपुर छ.  ग. 
                
 शीर्षक _विधाता 

विधाता  तेरे लेख अनोखे |
कैसे समझे कैसे जाने |

तुझ पर हम विश्वास  कर |
रहते है |हम तेरे सहारे |
कहते है| की अब तू ही जाने |

विधाता  तुम हो,  दाता तुम  हो |
कर्ता  तुम हो धर्ता  तुम हो |
अंत में सब तुझको ही माने |

तेरी माया समझ सके ना क़ोई |
तुम्हारी महिमा न्यारी |
तुम भाग्य  विधता, उसको सब माने |

हार तुमसे जीत  तुमसे सब  तेरी मर्जी  |
तुझसे ही चलते  काज  सारे |
माया के खेल के पैमाने |

तेरी इस दुनिया  के खेल निराले |
हँसना  रोना सब इसमें  रख डाले 
करे क़ोई कैसे मनमाने |

तेरी सत्ता है | हर क़ोई जाने |
पर  तेरीकृपा हो जाये ऐसी |
ज़ब विपदा पड़े तब ही माने |

पल में पल बदल जाता है | 
फिर  नहीं लौटता  है | वही पल 
यही माया उसकी  वही जाने |

साँझ के बाद सवेरा |
अँधेरे  के बाद उजाला |
किस्मत के खेल निराले |
विधाता  ही जाने |

विधाता  तेरे लेख अनोखे |
कैसे समझे कैसे जाने |

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