बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _विधाता
विधाता तेरे लेख अनोखे |
कैसे समझे कैसे जाने |
तुझ पर हम विश्वास कर |
रहते है |हम तेरे सहारे |
कहते है| की अब तू ही जाने |
विधाता तुम हो, दाता तुम हो |
कर्ता तुम हो धर्ता तुम हो |
अंत में सब तुझको ही माने |
तेरी माया समझ सके ना क़ोई |
तुम्हारी महिमा न्यारी |
तुम भाग्य विधता, उसको सब माने |
हार तुमसे जीत तुमसे सब तेरी मर्जी |
तुझसे ही चलते काज सारे |
माया के खेल के पैमाने |
तेरी इस दुनिया के खेल निराले |
हँसना रोना सब इसमें रख डाले
करे क़ोई कैसे मनमाने |
तेरी सत्ता है | हर क़ोई जाने |
पर तेरीकृपा हो जाये ऐसी |
ज़ब विपदा पड़े तब ही माने |
पल में पल बदल जाता है |
फिर नहीं लौटता है | वही पल
यही माया उसकी वही जाने |
साँझ के बाद सवेरा |
अँधेरे के बाद उजाला |
किस्मत के खेल निराले |
विधाता ही जाने |
विधाता तेरे लेख अनोखे |
कैसे समझे कैसे जाने |
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