स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक - बातों के बादशाह बनो
व्याख्या--कवि के द्वारा बातों के बादशाह बनने पर जोर दिया गया है उनकी नजर हर कार्य बात से ही बनते है एक नेता बातचीत के कारण बनता है कलाकार बनना भी बात को ही आधार लेकर बनते है । हमें बात चीत में आगे रहना चाहिए अच्छे बात चीत का जीवन में बहुत महत्व है ।इस बात का वर्णन किया गया है ।
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बातों के बादशाह बनो
बातों के बादशाह बनों ।
जीवन में काम आते हैं ।
आज के समय में सिर्फ।
बात ही पूजे जाते है ।
जिसका बात अच्छा होगा ।
वह नेता बन जाता है ।
दो चार व्यक्ति इकट्ठा कर ।
जय का नारा लगाता है ।
कुछ लोग उसे सुनते हैं ।
सुनकर मन में गुनते है ।
क्या कह रहा यह बन्दा ।
फिर उनको समझाता है ।
बातों से कलाकार बनते ।
सच झूठ का खेल दिखाते ।
साधारण जनता न समझे ।
अनुकरण पर आ जाते ।
बातों का धंधा बड़ा तेज ।
आमद इसमें चौतरफा ।
इस राह में जो चलता ।
चलता उसका है चरखा ।
वही संत वही ज्ञानी ।
वही पूज्य है जग में ।
बातों की कला मित्रों ।
नहीं आती है सब में ।
अगर आ जाते राह सरल ।
सुधा कह दोगे चलेगा गरल ।
किसके पास है समय कुछ ।
हर कोई यहां है चल चल ।
जिसके पास बातों का थैला ।
उन्हें पाओगे सलाहकार ।
बातों से वफादारी झलकती ।
मन से भले हैं गद्दार ।
बातों से हिमालय नपता ।
बातों से सागर की गहराई ।
बातों से सलाह मशविरा ।
बातों में बढ़ ताकत भाई ।
कुल मिलाकर बातों से ।
हर उंगली में घी ।
बात का ही स्वामी बनो ।
फिर जीवन ही ही ही ।
गिरधारी लाल चौहान
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