जिला :- महासमुन्द
विधा :- तांटक छंद
शीर्षक :- वीर भगत सिंह
#######################
भारत की गोदी में खेला, वीर सपूत दिवाना था।
आजादी की आस लिए वह, शेर बड़ा मस्ताना था।।
जोश भरा रग - रग में जिसके, देशभक्त मतवाला था।
सर बाँध कफन चलता था वह, वह तो हिम्मत वाला था।।
बंगा की पावन माटी का, लाल बड़ा दिलवाला था।
शेरों की बस्ती में जन्मा, धधक रहा वह ज्वाला था।।
काँप गया था राज सिंहासन, जब उसने बम फेंकी थी।
भारत माँ के पूत की शक्ति, तब दुनिया ने देखी थी।।
पूरा भारत जाग उठा था, इंकलाब के नारों से।
वीर सपूत कई टूट पड़े, भारत के गलियारों से।।
नवजवान था देश का जिसे, देख जवानी आई थी।
जैसे शांत पड़े मौजों में, लौट रवानी आई थी।।
बारह बरस की आयु थी जब, सुख व चैन को छोड़ा था।
जलियांवाला की घटना ने, हृदय को झंकझोरा था।।
भगत सिंह परम भक्त देश का, जग ने जिसको माना था।
आजादी का दूल्हा जिसको, सकल विश्व ने जाना था।।
हँसते- हँसते झूल गया वह, अमर हुई कुर्बानी थी।
इसलिए माँ भारती भी तो, उसकी हुई दिवानी थी।।
#######################
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने वीर शहीद भगत सिंह के जीवन व व्यक्तित्व को अपने शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
No comments:
Post a Comment