Wednesday, September 30, 2020

पदमा साहू की रचना- प्रेम

रचनाकार श्रीमती पद्मा साहू
 खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
छंद मुक्त कविता- *प्रेम ही हमारी ताकत*


प्रेम ही वशीकरण, प्रेम जीवन का आधार है ।
राम  से  प्रेम  ही तो, शबरी  का उद्धार  है  ।
प्रेम  हमारी  ताकत , प्रकृति का मनुहार  है ।
राधा कृष्ण का प्रेम ही तो, सृष्टि का आधार है ।

ऊंच-नीच न जाने प्रेम, स्वार्थ प्रेम निराधार है ।
सखा प्रेम कृष्ण सुदामा का, जग का आधार है ।
प्रेम अंतर्मन  की  सुख ,देखे  न कोई आकार है ।
प्रेम रिश्तो को  बांधती, वही  बड़ा उपहार है ।

प्रेम बिना नीरस सब, न कोई व्यवहार है ।
निःस्वार्थ  प्रेम ही , जगत  का आधार है ।
प्रेम  एक  एहसास, प्रेम  संगीत नाद है ।
प्रेम से सुर वीरों का, टूट गया अहंकार है ।

प्रेम बसे ह्रदय तो, बेजुबान प्राणी भी परिवार है ।
प्रेम बिन प्रकृति अधूरी,प्रेम बिना सुना संसार है ।
प्रेम रस  में  डूब  जाओ , सभी  का उद्धार  है ।
माया तो ठगनी होती, माया से परे प्रेम अपार है ।

स्वरचित
श्रीमती पदमा साहू  *पर्वणी* 
खैरागढ़

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