Thursday, September 24, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- बॉलीवुड

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (अर्थान्तरन्यास अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"बॉलीवुड"
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फैला नशा देख, बॉलीवुड है नेक 
निगलते हैं  धुंआ  रोशनी  है तेज

चका  चौन्ध  से  है  भरा   अंधेरा 
अंधेरे में कुकर्मों का लगा है फेरा

कबाब खाना कुछ हजम न होता
परोसें  चाहे   चांदी  का   कटोरा 

नायक,जब खलनायक संग छिपे
पर्दे से पर्दा हटा, राज कहां टिका

गूंज   हुई  खामोशी   में  भी  जब
पैर छोड़ पाज़ेब आसमां में   उड़ा

उड़ने  वाले भूल  चुके थे  उतरना 
उड़े थे कहां से उन्हें था  समझना

शोहरत  थी   दिलों   में   राज  था 
नशा क्या तुम्हें इससे भी खास था

बता   दो   आज     आवाम    को 
असली  के पीछे नकली चेहरा था

उनके   दिलों  से  खेला  है   तुमने
जिनके दिलों  पे  तुम्हारा पहरा था  ।

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