रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-लघु कथा
विषय-अद्वितीय सत्य
शीर्षक- छलावा
सोहनलाल जी एक 70 वर्षीय दिलदार,हँसमुख और मिलनसार व्यक्ति थे। वे जीवन भर अपने परिवार के लिए तथा दूसरों के लिए कार्य करते रहे।सभी के जरूरत के वक्त काम आना यथासंभव उनकी सहायता करना ,खुशियां बाटना उन्हें बहुत पसंद था।
उनकी तबियत खराब हो गई पत्नी और बेटी के अलावा कोई पूछने तक नही आया।जांच करवाई तो कोरोना पॉजिटिव निकले ,सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया,जब लोगो को पता चला तो कल तक जो सहायता पाने के लिए आगे-पीछे घूमते थे सब कन्नी काटने लगे कि कहीं हमसे कोई सहायता ना मांग लें। परिवार बेबस उनके स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना करता रहा पर होनी को ना टाला जा सका और अस्पताल में 5 दिन के बाद उन्होंने अंतिम साँस ली।परिवार का सिर्फ एक सदस्य उनके अंतिम संस्कार में शामिल हो पाया।जिस इंसान ने जीवन भर लोगो की सहायता की उसकी ऐसी विदाई देख मन कचोटने लगता है।यहां तक कि परिवार के दुख में भी एक भी व्यक्ति शामिल नही हुआ शायद यही अद्वितीय सत्य है इंसान अकेले आता है और अकेले की जाता है और जो ये दुनिया का मेला है वह सिर्फ एक छलावा है।
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