जिला -कांकेर, छग
विषय-अद्वितीय सच
शीर्षक- *वह बच्चा अब सर्जक*
विधा-लघुकथा
तब वह रसायन की व्याख्याता बन सेंट माइकल स्कूल कांकेर में पदस्थ थी ।रसायन के अलावा 7वीं को क्राफ्ट पढ़ाना था।ऊन से चूजा बनाना सभी 40बच्चों को अच्छा लगा ।
एक बहुत भावुक बच्चा, जिनके मम्मी -पापा दोनों डॉक्टर थे।बहुत ध्यान से चूजा बनाता था ।
सरकारी नौकरी लगते ही वह मैडम स्कूल छोड़ चली गई।एक दिन शादी का कार्ड मिला ।उसी बच्चे का था।वह MBBS MD सर्जन ,डाँक्टर बने उस Student से मिल कर बहुत खुश हुई।उसने बताया था कि चूजा बनाना अभी तक नहीं भूला व दोस्तों को जन्मदिन पर चूजा बना कर गिफ्ट देता है ।
वह फिर बहुत खुश हुई।
उसकी डॉक्टर की नियुक्ति कांकेर सरकारी अस्पताल में हुई थी ।मैम ने उसे बधाई दी।उसने कहा आपका आशीष यूं ही मिलता रहे ।
कल मैडम समाचार पत्र में यह पढ़ कर गदगद हो गई कि प्रहर्ष क्लाडियस ने सरकारी अस्पताल में सर्जरी की ।अब मरीजों को राहत मिलेगी ।
वह चूजा बनाने वाला बालक अब सर्जक बन गया था ।यह अद्वितीय सच है ।
और यह भी उतना ही सच है कि 96में मैं उस बच्चे की क्राफ्ट शिक्षिका थी।
*मीरा आर्ची चौहान*
*कांकेर,छग*
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