संबलपुर,जिला-कांकेर,(छ.ग.)
विषय :- *प्राकृतिक आपदाएं*
(सन्देह अलंकार का प्रयोग)
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*प्राकृतिक आपदाएं*
प्राकृतिक आपदाएं जब आती है
तांडव संग कहर भी लाती है,
अनावृष्टि और अतिवृष्टि
दोनों ही कहर बरपाती है।
भूकम्प,सुनामी,ज्वालामुखी
आपदाएं है इंसानी जान की भूखी।
सूखी धरा है या धरा की चीत्कार
मानव संस्कृति को रहती ललकार।
ये सैलाब है या
सपन बहाने वाली लहर,
डूबते,उतरते जलप्रवाह
या उमड़ती कहर।
प्रलय का आगाज या
नव निर्माण का साज,
नवरूप धरने को
प्रकृति है तैयार आज।
प्रलय गीत या मृत्यु का
स्वागत करता महा संगीत,
कैसे कह दूं अवसान
आ गया है मेरे मीत।
भूचाल आया था,डगमगाई धरा
सुनामी श्मशान बना गई शहर,
सुलग रहा ज्वालामुखी, या
मन उपजा क्रोध का कहर।
*सन्देह अलंकार का प्रयोग* :-
1.सूखी धरा है या धरती
का चीत्कार
2.सैलाब है सपन बहाने
वाली लहर,
3.डूबते उतरते जल प्रवाह
या उमड़ती कहर।
4.प्रलय गीत या मृत्यु का
महा संगीत आदि
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर(छ.ग.)
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