Tuesday, September 22, 2020

विनोद कुमार "जोगी" कृत आलेख- मेरा गांव

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
विषय :- 10 वर्ष पहले मेरा गांव
विधा :- आलेख
शीर्षक :- समय के साथ बदलता मेरा प्यारा गांव।

#######################

अगर हम वर्तमान परिदृश्य में गांव को देखें, और आज से दस वर्ष पूर्व के गांव को देखें तो जमीन आसमान का अंतर देखने को मिलेगा। आज से वर्षों पूर्व का वह गांव जब लोगों के रिश्तों में मिठास थी, लोगों के बोल में मिठास थी। साथ ही लोग भाईचारे के साथ रहते थे। उस समय गांव में संचार के माध्यम विरले ही मिलते थे, लेकिन दूर होकर भी लोगों के दिल व विचार आपस में मिल जाते थे। मनोरंजन के यांत्रिक साधन बहुत ही कम हुआ करते थे, लेकिन लोग आपस में मिलकर एक दूसरे का मनोरंजन कर अपनी थकान मिटा लिया करते थे। उस समय गांव की माटी की सोंधी मन को मोह लेने वाली थी। गांव के चौराहों पर उगे नीम, वट व पीपल जैसे आरामदायक पेड़ों की छांव सुकून दायक हुआ करती थी।
            आज आधुनिकता की दौड़ में गांव भी शहरों के साथ होड़ लगा कर विकास के उस तथाकथित श्रृंगार से श्रृंगारित होना चाह रही है जो उसके प्राकृतिक श्रृंगार की छटा को धूमिल कर रही है। मानव अतिक्रमण से पेड़ पौधे कट रहे हैं, माटी की सोंधी की जगह कांक्रीट की दुर्गंध बारिश के साथ फिजाओं में फ़ैल जाती है। गांव के वो रंगमंच व चौपाल जहां मनोरंजन युक्त कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था वो आज सूने पड़े हैं। और पाश्चात्य संस्कृति की चासनी में डूबी इस ग्राम्य जीवन में अब वो मिठास नहीं रही।
वर्तमान परिदृश्य में हमें अपने गांव की सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने की आवश्यकता है। और इस परिस्थिति को देखकर महान कलमकार श्री शैलेश लोढ़ा जी की कालजई पंक्ती सत्य होती दिखाई पड़ती है। उन्होंने कहा था कि - 
"ईक्कीसवीं सदी का बस इतना सा प्रभाव है,
कि पहले अभावों में खुशियां होती थी,
और आज खुशियों का अभाव है।"

#######################

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...