जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विषय - हिन्दी हैं हम
विधा - आलेख
शीर्षक - समृद्ध भाषा हिन्दी
हिन्दी विश्व की सर्वाधिक उन्नत भाषा है । हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या 2,50,000 से भी अधिक है । हिन्दी एक व्यवस्थित व वैज्ञानिक भाषा है जो सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है । हिन्दी का शब्द कोष बहुत विशाल है । एक - एक भाव को व्यक्त करनेवाले सैकड़ों - पचासों शब्द हैं । क्योंकि हिन्दी को संस्कृत शब्द-संपदा एवं नवीन शब्द रचना सामर्थ्य विरासत में मिली है ।
अंग्रेजी भाषा की मानसिक गुलामी एवं पूर्वाग्रह के कारण हम लोग हिन्दी की उपेक्षा कर देते हैं । विशाल जनसंख्या वाले इस देश मे हिन्दी ही वह ताकतवर भाषा है जो सबको एक सूत्र में पिरो सकती है और भारत की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रख सकती है ।
वास्तव में हिन्दी एक राष्ट्रीय भाषा है और राष्ट्र का गौरव है । इसे अपनाना हमारा राष्ट्रीय कर्त्तव्य है । हमें जापानियों की तरह सदैव अपनी मातृभाषा में हो बोलना चाहिये चाहे कहीं भी जायें । हम तो घर मे भी हिन्दी बोलते समय बीच - बीच मे अंग्रेजी के कई शब्द घुसेड़ देते हैं । अर्थात् शुद्ध हिन्दी भी नहीं बोल पाते, ऐसी दयनीय व हास्यस्पद स्थिति आ जाती है ।
अपनी मातृभाषा हिन्दी की गरिमा को पहचानना होगा । चिकित्सा , इंजीनियरिंग , कम्प्यूटर , कानून आदि की पढ़ाई हिन्दी मे होनी चाहिये । घर , ऑफिस , दुकान , कोर्ट - कचहरी , संसद , सम्मेलन इत्यादि सभी में हिन्दी का प्रयोग करें । तभी परिवर्तन आयेगा ।
संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को एक मत से निर्णय लिया कि हिन्दी ही राजभाषा होगी । इसी कारण राष्ट्र भाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर 1953 से सम्पूर्ण भारत मे 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
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