विषय _10साल पहले मेरा गाँव मेरा शहर
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ.ग.
शीर्षक -मेरा शहर बिलासपुर
मेरा शहर बिलासपुर जो की आज भी अपने गरिमा मान
सम्मान को बनाये हुये है |
जो मेरी जन्म भूमि है | हम इस शहर की पुरानी यादो को
कभी भूल नहीं सकते है |
इसके अलावा क़ोई दूसरा शहर अच्छा लगता ही नहीं हम छोटे थे |हम इस शहर को पल _पल बदलता देखते हुये बड़े हुये है | अपना बिलासपुर और यहाँ के रहने वाले लोग मिलनसार और मदद करने वाले अच्छे दिल के लोग थे |अब सब मतलबी हो चुके है |सब केवल मतलब से ही एक दूसरे से संबंध रखते है | पहले सब मिलकर रहते थे | पर कभी कभी और शहरों की भाँति यहाँ भी अप्रिय घटना घट जाती है |
हमारा घर रेलवे स्टेशन के पास ही है| हम हमेशा ट्रेन की आवाज सुन सुन कर ही बड़े हुये खुश हुये रेलवे लाइन को बार _ बार पार किये |कभी डर नहीं लगा |
पर अब सबकुछ बदल गया है पहले रेलवे क्रासिंग थीं | अब अंडरब्रिज पहले हम स्टेशन के किनारे व्यापार विहार से होकर स्कूल जाते थे |आज सब परिवर्तित हो गया है|अब वँहा पर केवल रेलवे स्टेशन के एरिया है | पास मे बुधवारी बाजार है |जो आज भी वंही है पर उसका स्वरूप बदल गया है |
पहले शांत और अच्छा माहौल था लेकिन अब भगमभाग ही दिखती है |
बिलासपुर शहर मे अब उच्च न्यायलय है |बहुत सारे भवन मॉल आदि बने इसका नगरीकरण और ज्यादा हो गया प्रदूषण बढ़ गया जनसंख्या भी बढ़ी |
दस साल पहले का बिलासपुर और अभी के बिलासपुर मे बहुत बदलाव आया | पर बदला हुआ बिलासपुर पहले के बिलासपुर की अपेक्षा केवल परिवर्तित हुआ है पहले जैसे शांत वातावरण नहीं है अब केवल यहाँ नगरीकरण
अपने चरमसीमा मे पहुँच चुकी है |
फिर भी अपना शहर है समय के साथ बदलाव जरुरी है| अपने बिलासपुर का विकास होते देख मन को अच्छा लगता है |आने बाली पीढ़ी को सारी सुविधाएं मिले तो ये बहुत ही अच्छा है।
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