विषय _मुक्त उदाहरण अलंकार
रचनाकार - सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _प्यारा यह संसार है |
देखो तो कुदरत का बनाया यह एक परिवार है |
जहाँ बहती है |नदिया बिना किसी परवाह के,
जहाँ उड़ते है | पंछी बिना किसी रोक के,
हाँ प्यारा ये संसार है |
पहाड़ो से सीखो सदा ऊँचा अरमान रखना |
रास्तो से सीखो धीरे धीरे मंजिलतक चलना
कलियों ने सिखाया कुछ पल का ही हो जीवन लेकिन
हँसते हुये जीना |
हाँ प्यारा ये संसार है |
पेंड़ कहते है बिना बदले के उपकार करो
जितना हो सके अपनों से प्यार करो
ना रखो मेल मन में हाँ बस मिलकर प्यार भरा
घर _बार रखो |
हाँ प्यारा ये संसार है |
सूरज कहता है |बिना रुके नित्य अपना कर्म करो |
बिना स्वार्थ के अपना ये धर्म करो |
ईश्वर की बनाई ये दुनिया प्यारी है |
इसका मत तिरस्कार करो |
हाँ प्यारा ये संसार है |
ये संसार एक बगिया जैसा |
जिसमे फूल अनेक है | रंग बिरंगे सारे के सारे |
अलग अलग पहचान है |
वैसे ईश्वर ने हम मनाव को बनाया |
जो रंग रूप में अलग _अलग पर सब उस,
ईश्वर की संतान है |
हाँ प्यारा ये संसार है |
उसने जीवन दिया है | उसका आभार मानो |
तन, मन, धन सब उसका ये मान लो
बिना वजह मेरा मेरा का ना ध्यान करो |
सब उस उपरवाले ने दिया |
उनका तुम उपकार मानो |
हाँ प्यारा ये संसार है |
रचनाकार -सावित्री यादव "सवि "
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