Friday, September 4, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि " की रचना- प्यारा संसार

 
विषय _मुक्त  उदाहरण  अलंकार 
रचनाकार  - सावित्री  यादव "सावि "
               बिलासपुर  छ. ग. 
शीर्षक _प्यारा यह  संसार है |

देखो तो कुदरत  का बनाया यह  एक परिवार है |
जहाँ  बहती है |नदिया बिना किसी परवाह के, 
जहाँ  उड़ते है | पंछी  बिना किसी रोक के, 
हाँ  प्यारा ये संसार है |

पहाड़ो से सीखो सदा ऊँचा  अरमान रखना |
रास्तो से सीखो धीरे  धीरे  मंजिलतक चलना 
कलियों  ने सिखाया कुछ पल का ही हो जीवन लेकिन 
हँसते  हुये जीना |
हाँ  प्यारा  ये संसार  है |

पेंड़ कहते है बिना बदले के उपकार करो 
जितना हो सके अपनों से प्यार करो 
ना रखो मेल मन में हाँ  बस मिलकर प्यार भरा 
घर _बार  रखो |
हाँ प्यारा ये संसार है |

सूरज कहता है |बिना रुके नित्य  अपना कर्म  करो |
 बिना स्वार्थ के अपना ये धर्म करो |
 ईश्वर  की बनाई ये दुनिया प्यारी है |
 इसका  मत तिरस्कार  करो |
 हाँ  प्यारा  ये संसार है |
 
ये संसार एक बगिया जैसा |
जिसमे फूल अनेक है | रंग बिरंगे सारे के सारे |
अलग अलग पहचान है | 
वैसे ईश्वर  ने हम  मनाव को बनाया |
जो रंग रूप में अलग _अलग  पर सब उस, 
ईश्वर  की संतान है |
हाँ प्यारा ये संसार है |

उसने जीवन दिया  है | उसका आभार मानो |
तन, मन, धन सब उसका ये मान लो 
बिना वजह मेरा मेरा  का ना ध्यान  करो |
सब उस उपरवाले ने दिया |
उनका तुम उपकार मानो |
हाँ प्यारा  ये संसार है |

रचनाकार  -सावित्री यादव "सवि "
               

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...