जिले का नाम - बलरामपुर
शीर्षक - टूट गया
हँसता खेलता इंसान टूट गया
ज़िन्दगी बसने से पहले उजड़ गया
जो सबको ख़ुश रखता था पहले
ख़ुद मुस्कुराने के लिए वज़ह ढूंढता रह गया
मुक़म्मल होनी थी जो कहानी कबकी
उस कहानी का कलम खुद में रूक गया
जो मरने से डरता था हमेशा से अब,
कहानी में मरने की कोशिश करता रह गया
हर ग़म में ख़ुशी ढूंढ़ता था वो इंसान
अब खुशी में भी खुशी नहीं मिलती उसे
जो माहताब को अधरो में सजाता था अब वो,
थमने लगा,जैसा कहीं कोई शहर उजड़ता रह गया
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