स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा -मुक्त
शीर्षक -
*साक्षरता*(बाल-कविता)
अधूरापन महसूस,
करोगे सदा,
कहने में,
समझने में,
सोचने में भी,
रहोगे अगर,
निरक्षर तुम,
उच्चारण सिखाती
वर्णमाला,
समझ बढ़ाती
अभ्यास-माला
पुस्तक वाचन
सुधार करवाती।
आत्मविश्वासी बनोगे
जब रहोगे साक्षर
अक्षर-अक्षर जोड़कर
कह लोगे मन की बात
पढ़- लिखकर
बनोगे समझदार
ये दुनिया है बच्चों,
बड़ी चतुर चालाक,
ठगे तुम जाओगे,
रहोगे गर निरक्षर,
साक्षर बनोगे तब,
समझोगे हर बात,
देश की उन्नति मे
बनोगे साझेदार ।।
अनुरमा शुक्ला
दुर्ग(छ.ग.)
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