रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग.)
विषय - अमावस्या
विधा - छंद मुक्त कविता
अलंकार - वाक्यार्थोपमा अलंकार
शीर्षक - सर्वपितृ अमावस्या
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।। सर्वपितृ अमावस्या ।।
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सर्वपितृ अमावस्या को ,
पितृपक्ष का अंतिम दिन ।
आते हैं अपने घर - द्वार ,
ज्ञात-अज्ञात समस्त पितरगण ।।
अमावस्या की श्राद्ध से ,
पितृदोष कम होते ।
पितर प्रसन्न होकर जाते ,
आशीर्वाद बरसाते ।।
पितरों को संतृष्ट करने का ,
शास्त्रों में विविध उपाय ।
गीतापाठ हवन मंत्रोच्चार ,
दान भोज भी किया जाय ।।
मृत जीवों की सद्गति होते ,
अजर अमर आत्मा का भान ।
जैसे ध्यान-भजन करने से ,
होते हैं पारमार्थिक कल्याण ।।
सबके हित मे अपना हित ,
श्राद्ध कर्म का संदेश महान ।
पाखण्ड अंधविश्वास नहीं ,
स्वयं सिद्ध शास्त्रीय प्रमाण ।।
ऐसे कितने धार्मिक कार्य ,
तिथि अनुसार होते हैं ।
यथा दिवाली होली नवरात्रि ,
निश्चित तिथि में आते हैं ।।
जैसे आभूषण श्रृंगार से ,
नारी सुशोभित होती है ।
श्रद्धा युक्त सत्कर्म से भी ,
जीवन खिलती - महकती है ।।
देवों की भूमि है भारत ,
संत - महापुरुषों की खान ।
अवतारों की लीला - गाथा ,
गाते अपने वेद - पुराण ।।
दया प्रेम करुणा मानवता ,
ऋषि-मुनि-शास्त्रों के कारण ।
नही तो बिना आग ही दुनिया ,
जलती रहती नित क्षण-क्षण ।।
सत्य सनातन हिन्दू संस्कृति ,
दिव्य अनादि विलक्षण है ।
असली मानव धर्म यही ,
वैश्विक जीवन दर्शन है ।।
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वाक्यार्थोपमा अलंकार -
1- जैसे ध्यान - भजन करने से
2- यथा दिवाली होली नवरात्रि
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